PoemSri

बेटी-----कन्या

(१)  मां ने मुस्कुराकर,
       मुन्ने से पूछा,
       कुछ इठलाकर यूँ------
       आज मुझे बाजार मिली थी,
       तेरी कालेज वाली गर्लफ्रेंड,
       बोल क्या------बोलता तू-------
       पास खड़ी थी - उसकी लड़की,
       आँख तरेरकर मां उससे बोली,
       खड़ी खड़ी क्या सुनती रहती,
       आलतू फालतू की बातें तू-------- (२)  दोनों ही कलेजे के टुकड़े-------
       एक अतिप्यारा,
       एक टुकड़े-----------टुकड़े------------
       अतिप्यार में, एक------अतिदंभी रहे
       दुत्कार से दूजा, कन्या होने की गुंथी सहे
(३)  लड़की बोली मां से, फिर
       ले थाम जिगर,
       तू--------जोर से अपना-----
       मेरे जनम का सेहरा – सर मेरे तो,
       मैं खुद ही करूंगी,
       पूरा------- मेरा सपना---------

(४)  निकल पड़ी वो घर से अकेले
       था, साथ में उसके संपूर्ण समाज ----
       रस्ते तो कांटे ही भरे थे, बिखरे पड़े थे,
       दानव - दैत्य लोलुपता के पहने ताज----
(५)  घोर अँधेरे कुछ ना दिखे
       पर भोर का आना----तय रहता है------
       द्रढ़ निश्चय करके, कमर कसी तो
       सर पीठ पे साया मिल जाता है---------
(६)  मिल जाती है मुहब्बत, उनसे भी,
       हम, जिनको गैर-------समझते हैं -----
       वो गैर --- गैर सब मिलकर ही
       एक स्वस्थ समाज बनाते हैं --------
(७)  ऐसे ही नेक --- सरल मृदुभासी, सब
       जन जनी का सदर अभिनन्दन है ------
       उनकी ही तपस्या की, ये खुशबु है
       की, मन--------शीतल है,
       क्योंकि,
       अपना देश, नंदन-----वन है------

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