PoemSri
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दारू—शाला-----

(१)   जल्दी –जल्दी----------पीना--है
       क्योंकि----------------------------
       जल्दी—जल्दी-----------जीना--है
       क्या- करेंगे--------जी------करके
       साल--------दर-------साल
       जियेंगे—मरेंगे---लादी---ढो—ढो---करके
       साल--------दर-------साल
(२)  मरना—ही--है-----मुस्कुरा –के--मरें
       क्या--------मरने का--- इंतजार--------करें
       मरना—क्या-----सरल—है-----इतना
       जीने—से—ज्यादा--कठिन—है--कितना
(३)  जीवन—की—हर-----कठिनाई-----में
       अपनों-से--घिरे---खुद--की---तनहाई---में
       ढूडते—हैं---जो---एक- दोस्त---हमारा
       बिन—कहे—सुने---दे--साथ---हमारा

(५)  खुश—होकर---उसे–होठों---से-लगा
       हम—प्यासे-----------
       जब-—यार—को---अपने---चूमतें--हैं
       क्यूँ—आग--कलेजे--लगती--है--सबके
       वे—-----देखतें-----हैं----------
       और--बिन—छुएँ—आग--जल-जातें--हैं
(६)  उनकी---आग-------मुझको---नहीं
       उनको--- ही-------झुलसाएगी
       मेरा--- पानी ------उनको----नहीं
       मूझको------ ताजा ----कर---- जाएगी
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